Sunday, 27 February 2011

हाइकु कविताएँ

तम से डर
निकली है दिन में
लुटी दोपहरी ।


जाड़े की धूप
गरीबी का ओढ़ना
बिटिया हँसी ।


- सुमन दूबे मनस्विनी